मूक-बधिर रेप पीड़िता ने इशारों से बताई जुर्म की दास्तान सरगुजा में अदालत ने आरोपी को दी 10 साल की सजा
सरगुजा :- सरगुजा में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीसी ममता पटेल की अदालत ने मूक-बधिर युवती से रेप के आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है। बोल एवं सुन पाने में अक्षम युवती ने इशारों से कोर्ट को अपने साथ हुए जुर्म की दास्तान सुनाई। कोर्ट ने युवती के इशारों को गवाही माना। इशारों को समझने में युवती की मां एवं मूक-बधिर विशेषज्ञ ने कोर्ट की सहायता की। मेडिकल रिपोर्ट एवं पीड़िता के बयान के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया।
जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर कोतवाली थानाक्षेत्र में 13 मार्च 2017 को होली के दिन मूक-बधिर युवती दोपहर में नहाकर घर पहुंची। युवती के घर में घुसकर आरोपी मुकेश पांडेय (37) निवासी बौरीपारा ने पीड़िता के साथ एक कमरे में रेप किया। इस दौरान पीड़िता ने विरोध करते हुए मुकेश पांडेय के हाथों में काट लिया एवं चिल्लाने की कोशिश की। उसकी आवाज सुनकर नाबालिग चचेरे भाई ने अपनी बड़ी मां (पीड़िता की मां) को इसकी जानकारी दी।
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परिजन पहुंचे तो भागा आरोपी पीड़िता की मां कमरे में पहंुची तो उसने आरोपी मुकेश पांडेय को पीटते हुए पीड़िता से अलग किया। आरोपी मौके से भाग निकला। पीड़िता की मां ने पुत्री के साथ कोतवाली थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले में कोतवाली पुलिस ने धारा 376, 450 के तहत अपराध दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी को 14 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी को 03 फरवरी 2018 में जमानत मिल गई।
मां के साथ अन्य गवाह भी मुकरे प्रकरण की सुनवाई के दौरान मामले की प्रार्थिया (पीड़िता की मां) भी अदालत में पक्षद्रोही बन गई और घटना की जानकारी होने से इंकार कर दिया। वहीं अन्य गवाह भी मुकर गए। घटना की सूचना अपनी बड़ी मां को देने वाले नाबालिग चचेरे भाई ने आरोपी के खिलाफ बयान दिया। मामले में विवेचना अधिकारी ने भी संदेहकारी विवेचना रिपोर्ट पेश की थी।
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पीड़िता ने इशारों में दिया बयानअतिरिक्त लोक अभियोजक राकेश सिन्हा ने बताया कि अदालत में पीड़िता का बयान उसकी मां एवं मूक-बधिर भाषा को समझने वाली विशेषज्ञ संध्या तिवारी की सहायता से दर्ज किया गया। पीड़िता ने इशारों से अपने साथ हुए जुर्म की कहानी कोर्ट को बताई।
पीड़िता ने अपने इशारों में रेप की पूरी घटना बताई तो कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। आरोपी कुछ दिनों पहले से पीड़िता के घर के पास रहता था, इसके कारण पीड़िता सहित अन्य साक्षी भी उसे पहचानते थे।
10 वर्ष की सजा के साथ अर्थदंड अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीसी ममता पटेल की अदालत ने मूक-बधिर पीड़िता के बयान एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी मुकेश पांडेय को दोषी माना। अदालत ने मुकेश पांडेय को धारा 450 के तहत पांच वर्ष एवं धारा 376 के तहत 10 वर्ष के कारावास एवं एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ चलेंगी।