अंबिकापुर: सरगुजा जिले के मुख्यालय उदयपुर से 3 किलोमीटर की दूरी पर पुरातत्व धरोहर स्थल रामगढ़ की पहाड़ी एक हफ्ते से लगातार आग लगा हुआ है और जल रहा है।जिसको बुझाने के लिए वन विभाग की टीम भी और वन प्रबंधन समिति द्वारा मिलकर आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन वह असफल हो रहे हैं कारण इसका यह है कि यह कि आग पहाड़ के चारों तरफ से लगा हुआ है जिसको बुझाने के लिए सैकड़ो लोग लग सकते हैं।
बताया जा रहा है कि दूसरा दुष्टता के कारण जानबूझकर होली के समय पूरे पहाड़ी के आसपास आग लगा दिया जाता है बताया जा रहा है जानकारी के मुताबिक कि किसी भी गांव के नागरिक इस तरह से जंगल में आज नहीं लगते हैं यह आग जानबूझकर असामाजिक तत्वों द्वारा लगा दिया जाता है जिसको बुझाने में प्रत्येक वर्ष संघर्ष किया जाता है लेकिन आज तक पहाड़ी में लगे आज को काबू नहीं पाया जा सका है यदि पहाड़ में आज सिर्फ एक तरफ से लगे तो आग बुझ सकता था लेकिन यहां तो पहाड़ी के चारों तरफ से आग लगाया गया है।
रामगढ़ पहाड़ी पुरातत्व धरोहर स्थल के साथ-साथ जीविका पार्जन एवं पहाड़ से कंदमूल दवा इत्यादि लोगों को उपलब्ध होता है और चैत्र नवरात्रि में 9 दिन का रामनवमी मेला किया जाता है जो वर्षों से चल रहा है।
बताया जा रहा है कि कुछ वर्षों पूर्व आज पहाड़ में लगा था किंतु उसकी जल्दी ही काबू कर लिया गया था लेकिन यहां तो कुछ वर्षों से जानबूझकर पहाड़ी में आग लगा दिया जाता है और उसको बुझाने में वन विभाग और वन प्रबंधन के तीन हर बार नाकामयाब होती है।
वन विभाग और जिला प्रशासन करे पहल
सरगुजा संभाग में जंगलों और पहाड़ों में आग लगा कोई नया बात नहीं है लेकिन इसके लिए सरकार वन विभाग या जिला प्रशासन के द्वारा आज तक तैयारी नहीं कर पाई है। जल जंगल बचाने एवं वन संपदा को बचाने के लिए तरह-तरह से बजट पेश कर पौधारोपण देखरेख करने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता मनरेगा योजना जल जंगल की रक्षा हेतु एनजीओ संस्था चलाना कोई नई बात नहीं है।
वन विभाग में वन कर्मियों को पहरेदार वनपाल बीटगार्ड दरोगा रेंजर डीएफओ इत्यादि पदों पर भर्ती कर शासन के द्वारा ड्यूटी प्रदान किया गया है, बावजूद इसके किसी भी बड़े पोस्ट पर बैठे अधिकारियों ने ऐसी कोई कार्य योजना नहीं बनाई है जिससे जंगलों को बचाया जा सके वन विभाग में सिर्फ खानापूर्ति ही दिखाई दे रहा है जिस तरह से जंगलों में सरगुजा संभाग के आग लगा हुआ है और जिस तरह से जंगलों का कटाई किया जा रहा है वहां पर वन विभाग और सरकार फेल नजर आता है।
जिला प्रशासन और वन विभाग की प्रशासन मिलकर यदि इसके लिए टीम बनाकर तैयारी किए रहे पहले से तो जंगलों को आग से बचाया जा सकता है यदि वन विभाग के पास फंड की कमी हो तो वहां मनरेगा पर भी मजदूर और फायरवाचर का भर्ती कर भुगतान किया जा रहा है यह भी कोई नई बात नहीं है।
यदि वन विभाग और जिला प्रशासन के द्वारा टीम तैयार कर तैयारी करें तो जंगलों की कटाई रोकने और जंगलों में आग लगने जैसी समस्या से निपटा जा सकता है।रामगढ़ पर्वत पर लगे आज को बुझाने के लिए रामगढ़ वन प्रबंधन सेवा समिति द्वारा 50% दिए राशि का उपयोग कर भी पहाड़ी को आग लगने से बचाया जा सकता है। वन संपदा को बचाने के लिए और वन्यजीवों की रक्षा के लिए प्रशासन की टीम को मुस्तादी से कार्य करना चाहिए तभी जाकर बचाया जा सकता है अभी जंगलों में आग लगने के वजह से जंगली जीव गांव में घूम रहे हैं बताया जा रहा है की सबसे सुरक्षित जंगल कर्म कट्ठरा जंगल में शीतल नीलगाय हिरण सांभर कोटरा के साथ जिराफ प्रजाति जंगली जीव कहीं दूसरे जंगल से दो नाग आज घुसे हैं जजगी मानपुर ग्राम वासियों के मुताबिक महुआ उठाने वाले लोगों के द्वारा बताया गया की सुबह-सुबह कई दिन हिरना के दल में बाहरी जंगली जीव भी अपने बचाव के लिए कर्म कट्ठरा जंगल में संघर्ष कर रहे हैं।
शान यदि लामरूप प्रोजेक्ट को चालू कर संरक्षण किया गया होता तो जंगलों और वन प्राणियों की रक्षा किया जा सकता था लेकिन यहां तो कोल खनन करने जैसे मुद्दों को लेकर प्रशासन की टीम चल रही है।वन विभाग एवं जिला प्रशासन की टीम मिलकर इन सारे मुद्दों पर चर्चा करें और कार्य योजना तैयार करें तो शायद वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा कर जंगलों को बचाया जा सकता है।