रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई से इंकार कर दिया और दोनों को हाई कोर्ट जाने को कहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट एजेंसियों की शक्तियों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार है। इस मामले पर छह अगस्त को सुनवाई होगी। पीएमएलए कानून को लेकर कोर्ट ने कहा कि इस कानून पर सवाल तभी क्यों उठता है, जब कोई रसूखदार गिरफ्तार होता है।

भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में आरोपी हैं। ईडी ने चैतन्य बघेल को इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना है। ईडी के अनुसार 2019-22 के बीच राज्य में 2100 करोड़ का घोटाला हुआ था। इसका पूरा पैसा चैतन्य ने ही मैनेज किया। उन्होंने 16.7 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट परियोजना के विकास पर किया।

ईडी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कथित घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ। इस घोटाले के जरिए शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों को 2,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ हुआ। ईडी ने इस मामले में अपनी जांच के तहत जनवरी में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा के अलावा अनवर ढेबर, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी अनिल टुटेजा, भारतीय दूरसंचार सेवा (आईटीएस) के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और कुछ अन्य को गिरफ्तार किया था।

ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 22 जुलाई को उन्हें अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी से संरक्षण मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने को कहा।

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