सरगुजा। नामांकन के साथ विधानसभा का चुनाव संग्राम शुरू हो चुका है। नामांकन के बहाने शक्ति प्रदर्शन की परंपरा भी है। शक्तिप्रदर्शन के जरिए सह भी बताने की कोशिश होती है, कि जन समर्थन किसके साथ हैं। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर पहले शुक्रवार को डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने अप्रत्याशित भीड़ के साथ नामांकन दाखिल किया तो सोमवार को भाजपा भी तीनों विधानसभा के भीड़ जुटाकर अपनी लाइन लंबी करने की कोशिश में दिखी, लेकिन भाजपा की रैली टीएस सिंहदेव की रैली के सामने फीकी नजर आई।



शुक्रवार को जब टीएस सिंहदेव रघुनाथ पैलेश स्थित कोठी घर से पैदल निकले तो लोगां का हुजूम उमड़ पड़ा। रैली का आगे का हिस्सा घड़ी चौक पहुंच चुका था, तब रैली महामाया चौक तक थी। पूरी सड़क पर लोगां की भीड़ ठसा-ठस थी। आलम ये था कि 11 बजे पैदल निकले सिंहदेव मुहूर्त से कुछ पहले ही कलेक्ट्रेट पहुंच सके। रास्तेभर लोग उनसे मिलकर शुभकामनाएं देते रहे। कुछ फूलों के हार लेकर खड़े थे तो छत से महिलाएं पुष्पवर्षा कर रही थीं। हालांकि पॉलीटिकल मामलों से इतर सिंहदेव के साथ सरगुजा महराज होने के कारण उनसे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं।

भाजपा का शक्ति प्रदर्शन पड़़ा फीका-
कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के अंदाज में नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को भाजपा ने भी शक्तिप्रदर्शन की तैयारी की थी। अंबिकापुर के अलावे लुंड्रा और सीतापुर से भी प्रत्याशी भीड़ लेकर पहुंचे थे, लेकिन फिर भी सिंहदेव के शक्ति प्रदर्शन के आगे भाजपा का प्रदर्शन फीका दिखा। गौर करने लायक बात यह भी थी कि भाजपा की रैली में भीड़ एक नवजवान के साथ सबसे अधिक थी। सीतापुर से भाजपा प्रत्याशी राम कुमार के साथ लोगों का हुजूम चल रहा था। हालांकि रैली में तीनों प्रत्याशी एक साथ रहे और भीड़ भी सम्मलित होकर चल रही थी, लेकिन नारे बता रहे थे की ये भीड़ किसके साथ आई है।

बहरहाल शक्ति प्रदर्शन में भाजपा काफी पिछड़ती हुई दिख रही है, लेकिन चुनाव मैदान में प्रदर्शन क्या होगा, यह चुनाव परिणाम के बाद पता चल सकेगा। परिसीमन के बाद भाजपा सरगुजा जिले के तीनों विधानसभाएं नहीं जीत पाई है। भाजपा क्या इस बार कोई चमत्कार करने में सफल रहेगी, क्योंकि पिछले चुनावों में भी नामांकन रैलियों का स्वरूप ऐसा ही रहा है और परिणाम रैली के अनुरूप ही आए हैं।

टीएस चौथी बार और अमरजीत पांचवीं बार चुनाव मैदान में
अंबिकापुर विधानसभा सीट से डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव लगातार तीसरी बार विधायक हैं और वे चौथी बार चुनाव मैदान में हैं। हर बार उनकी जीत का आंकड़ा बढ़ा है। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि उन्होंने पिछला चुनाव 39 हजार 600 से अधिक मतों से जीता था।

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