बलरामपुर जिला चिकित्सालय में मंगलवार कि दोपहर 21 वर्षीय युवती दुर्गावती को सीने में दर्द की शिकायत पर इन्होंने सोमवार को गांव के कथित झोला छाप डॉक्टर से इलाज कराया था जहां मंगलवार को युवती की बिगड़ती तबीयत देख परिजनों ने तत्काल बलरामपुर जिला चिकित्सालय इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई इसके बाद परिजनों ने इलाजमे लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है..

परिजनों ने बताया कि युवती सीना दर्द से कर्राह रही थी आरोप है कि दर्द से कर्राहती उस युवती को ऑक्सीजन देने के बजाय जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में मौजूद स्टाफो ने बोटल लगा दिया गया.. आरोप है कि इसके बाद युवती की तबीयत और बिगड़ने लगी.. परिजनों ने कई बार कहा कि इसे ऑक्सीजन लगा दीजिए क्योंकि इस सांस लेने में दिक्कत हो रही है पर किसी ने नहीं सुनी.. देखते ही देखते कुछ देर में युवती का दम घुटने लगा और उसकी मौत हो गई जिसके बाद पर अफरा तफरी मच गई.. हालत को बिगड़ते देख तत्काल मौके पर बलरामपुर कोतवाली थाना प्रभारी सहित कुछ अन्य पुलिसकर्मी पहुंच गए.. इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी बसंत सिंह ने बताया कि पहले से ही डॉक्टरों के द्वारा ऑक्सीजन लगा दिया गया था उनके अटेंडर के द्वारा बाथरूम ले जाया गया इसके बाद ही तुरंत चक्कर आ गया है.. पर सोचने का विषय यह है कि हर वार्ड में यूरिन पोर्ट उपलब्ध होती है उसके बावजूद भी बिगड़ती हालत में बाथरूम क्यों ले जाया गया ? क्या वार्ड में यूरिन पोर्ट नहीं था ? वही जिम्मेदार ने अपना पलड़ा झाड़ते हुए कहां की ऑलरेडी ऑक्सीजन लगा हुआ था ऐसे में सवाल उठता है जैसा कि परिजनों ने आरोप लगाया उसे ऑक्सीजन ही नहीं लगाया गया तो फिर ऑक्सीजन लगाने की बात कहां से आई ऐसे में गंभीर सवाल बनता है कि इलाज के दौरान भरपूर लापरवाही बरती गई है जिसका अंजाम यह हुआ कि युवती की जान चली गई.. हालांकि इस पूरे मामले में आज दूसरे दिन जब शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया इस वक्त स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और शव को फिर से PM करने के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया और मृतिका पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया..

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